भोपाल-कुछ लैण्ड स्केप्स

भोपाल-कुछ लैण्ड स्केप्स / हेमन्त देवलेकर

सुंदरता वह प्रतिभा हैजिसे रियाज़ की ज़रूरत नहींभोपाल

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महामारी के दिनों में

अनुराग अनंत की कविता ‘महामारी के दिनों में’

एक मैं कहाँ हूँ इन दिनों पूछोगे, तो बता नहीं पाऊँगा आँखों

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देवेश पथ सारिया की कविता महामृत्यु में अनुनाद

महामृत्यु में अनुनाद । देवेश पथ सारिया

महामारी के दौरान भी हो रहे होंगे निषेचनबच्चे जो सामान्य

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शुभम नेगी की कविता 'बीड़'

बीड़ । शुभम नेगी

पेड़ यहाँ के मूल निवासी हैंपेड़ों द्वारा लगायी

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El Jardin, Judithe Hernandez

मेरे अंदर औरत । अभिजीत सिंह

खुल गयी देह देह में छिपे कमरों का भेद कपड़ों का बे-तरतीब

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bargad

बोन्साई वाले बरगद । उज्ज्वल शुक्ला

मैंने देखा थाबड़े बरगद का काटे जाना आज भी एक बड़ा

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