बोन्साई वाले बरगद । उज्ज्वल शुक्ला

bargad

मैंने देखा थाबड़े बरगद का काटे जाना आज भी एक बड़ा दांतेदार आरा मेरे मस्तिष्क पर अपने दांत फँसाए हुए है पूरे गाँव में एक अकेला बरगद बाकी था ढोल का पोल बने तनों से निकली आवाज़ दूसरे गाँव तक गई जैसे पहली बार पनही पहनकर, लाठी लेकर धोती का एक सिरा कुछ लटकाए बाबा पैदल शहर गए थे लोगों को भ्रम था कि बरगद की जड़़े अक्सर …