अब दिन और रात पृथ्वी के घूमने से नहीं होते,⁣⁣⁣ मशीनों के घूमने से होते हैं

उद्योगपतियों ने सूरज को⁣⁣⁣
आकाश से निकालकर⁣⁣⁣
अपने कारखानों में लगा लिया है।⁣⁣⁣
⁣⁣⁣
चांद अब,⁣⁣⁣
कारखानों की शिफ्ट, ⁣⁣⁣
के हिसाब से आता जाता है।⁣⁣⁣
⁣⁣⁣
तारे बस प्रतीक्षा करते रहते हैं।⁣⁣⁣
शिफ्ट खत्म होने की।⁣⁣⁣
⁣⁣⁣
सुबह,⁣⁣⁣
कोयल की कूक,⁣⁣⁣
गोरैया के चहकने,⁣⁣⁣
से नहीं होती,⁣⁣⁣
सुबह मशीनों के चीखने से होती है।⁣⁣⁣

शाम,⁣⁣⁣
मंदिरों की घंटियों,⁣⁣⁣
मस्जिदों की नमाज,⁣⁣⁣
से नहीं होती,⁣⁣⁣
शाम होती है⁣⁣⁣
कारखाने की घंटी के बजने से,⁣⁣⁣
लाउडस्पीकर पर “शिफ्ट समाप्त”⁣⁣⁣
कहने से होती है।⁣⁣⁣⁣⁣⁣

अब दिन और रात,⁣⁣⁣
पृथ्वी के घूमने से नहीं होते,⁣⁣⁣
मशीनों के घूमने से होते हैं।⁣⁣⁣