वैभव मिश्रा की कविता – अधिकारलिप्सु

जहाँ मानवता ने हमसे हाथ मांगा
हमने जेबों में डाल लिए हाथ ।
जहाँ लोगों ने आशा से देखा
लगे आँख मीजने लाल होने तक ।