जीवन

अंशिका शुक्ला की कविता – जीवंतता

Anshika

मेरे पूर्वजों मुझे क्षमा करना
मैं अज्ञानी हूं
रीति – रिवाज़ो के पीछे छिपा
महान कारण नहीं जानती
जानती हूं तो सिर्फ़ इतना
कि “मृत को देखने से
कहीं ज्यादा आघात होता है
जीवित को पल – पल मरते देखने में!

अनुराग अनंत की कविता – सलीका

painting

पहाड़ चढ़ने का भी सलीक़ा है और उतरने का भीकिसी को भुलाते हुए यदि सावधानी न बरती जाएतो भुलाना याद करना बन जाता हैजीवन को अगर सलीक़े से न जिया जाएतो जीवन से जीवन जाता रहता हैजैसे देह से जाते रहते हैं प्राण किसी को बुलाओ तो ध्यान रहे आवाज़ में चुम्बक रहेलोहा-दिल लोग भी …

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