मेरे अंदर औरत । अभिजीत सिंह

El Jardin, Judithe Hernandez

खुल गयी देह देह में छिपे कमरों का भेद कपड़ों का बे-तरतीब तौर से उतरना लिख दिया गया हड़बड़ाहट लिख दी गयी उनके उतरने की मैं कहाँ पर गिरी नहीं लिखा गया किसी दीवार की खूँटी परया फ़र्श पर औंधे मुँह पड़े रहते हुए ही मेरा जन्म हुआ दीवार ने पीठ थपथपाने मेज़ ने सिर पर घाव देने चाय के कप ने चेहरा जलाने अस्तुरे …