hindi poetry

अंशिका शुक्ला की कविता – जीवंतता

मेरे पूर्वजों मुझे क्षमा करना
मैं अज्ञानी हूं
रीति – रिवाज़ो के पीछे छिपा
महान कारण नहीं जानती
जानती हूं तो सिर्फ़ इतना
कि “मृत को देखने से
कहीं ज्यादा आघात होता है
जीवित को पल – पल मरते देखने में!

अनुराग अनंत की कविता – सलीका

पहाड़ चढ़ने का भी सलीक़ा है और उतरने का भीकिसी को भुलाते हुए यदि सावधानी न बरती जाएतो भुलाना याद करना बन जाता हैजीवन को अगर सलीक़े से न जिया जाएतो जीवन से जीवन जाता रहता हैजैसे देह से जाते रहते हैं प्राण किसी को बुलाओ तो ध्यान रहे आवाज़ में चुम्बक रहेलोहा-दिल लोग भी …

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Handpicked Hindi Poems from June 2021

The Kiss by Gustav Klimt

एक बार पलटना तो चाहता हूँ – अभिजीत सिंह पीछे देखने के संदर्भ में • एक बारपलटना तो चाहता हूँ कि सूरज जब गिरेमेरी ही तरह वर्तमान सेवर्तमान में सम्मान मेंजब शाम के आकाश सेबीत चुके दिन के फूल गिर पड़ें और रिस रहा होमोहल्ले की एकलौती खुली खिड़की सेजब प्रेम खुली किताब काखुली आँखों …

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