देवांश दीक्षित

Devansh Diixt Poems India

देवांश दीक्षित उन्नाव, उत्तर प्रदेश से हैं और पेट्रोलियम विश्वविद्यालय, देहरादून
से केमिकल इंजीनियरिंग में स्नातक हैं। मूल रूप से हिंदी काव्य और गद्य लेखन
में सक्रिय। साहित्य के अलावा, गायन और यात्राओं में भी रुचि रखते हैं।
कविताओं के अनुवाचन हेतु ‘Ekaant’ नाम से पॉडकास्ट चैनल भी चलाते हैं।

तुम्हारा दुःख और मैं – देवांश दीक्षित

Plum Trees in Blossom by Camille Pissarro,

तुम्हारी आँख से ढलका आँसूपृथ्वी पर गिरते ही बन गयाहरसिंगार का फ़ूल मैं यह देख उत्सुक होताया तुम्हारी वेदना पर मूककभी इसका सटीक निर्णय ना कर सका तुम किसी अव्यक्त दुःख कीजीती जागती मूर्ति निकलीजिसने किसी संबल कीकभी माँग नही की आँखों की नमी कोमुस्कुराहट की लौ में दीप्त करनामैंने तुमसे सीखा कितनी बहादुर हो …

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अपवाद या सिद्धांत

अंतर्मन के बरगद से
तुम्हारी स्मृतियों की टहनियाँ काटते-काटते
न जाने कितने वर्ष गुज़र गये

खिड़की से बाहर
पृथ्वी की परिक्रमा करता चंद्रमा देख सोच रहा
कितनी समानता है स्मृतियों और चंद्रमा में

देवांश दीक्षित की कहानी – वो

Shiuli

पारिजात के फूल बहुत पसंद हैं उसे, जिन्हें लगभग रोज ही तोड़कर खोंस लेती है वो कनखियों से छुआते हुए अपने कानों पर। बिखरे हुए बालों संग, वो घुल जाती है दोपहरी की सांय-सांय में, मानो शिव बटालवी के बिरहा का कोई फ़कीर हो।

Handpicked Hindi Poems from June 2021

The Kiss by Gustav Klimt

एक बार पलटना तो चाहता हूँ – अभिजीत सिंह पीछे देखने के संदर्भ में • एक बारपलटना तो चाहता हूँ कि सूरज जब गिरेमेरी ही तरह वर्तमान सेवर्तमान में सम्मान मेंजब शाम के आकाश सेबीत चुके दिन के फूल गिर पड़ें और रिस रहा होमोहल्ले की एकलौती खुली खिड़की सेजब प्रेम खुली किताब काखुली आँखों …

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